10 मिनट में हार्ट अटैक के मरीज की जान बची, बलरामपुर अस्पताल में त्वरित इलाज का उदाहरण

बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हार्ट अटैक से पीड़ित एक मरीज की जान बचा ली। फैजुल्लागंज निवासी सुशील कुमार मिश्रा (59) पिछले तीन दिनों से सीने में दर्द की शिकायत से जूझ रहे थे। सामान्य सीने का दर्द समझकर उन्होंने स्थानीय स्तर पर दवाइयां लीं, लेकिन आराम नहीं मिला। दर्द और बेचैनी बढ़ने पर शनिवार सुबह वे बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे।
इमरजेंसी में मौजूद ईएमओ डॉ. सौरभ सिंह ने तुरंत मरीज को भर्ती कर ईसीजी और खून की आवश्यक जांचें कराईं। जांच रिपोर्ट में हार्ट अटैक (STEMI) के संकेत सामने आए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉ. सौरभ ने तत्काल कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. यूसुफ अंसारी से इमरजेंसी में परामर्श लिया। डॉ. यूसुफ ओपीडी छोड़कर तुरंत इमरजेंसी पहुंचे।
डॉक्टरों की सलाह पर बिना समय गंवाए मरीज को खून पतला करने वाली दवा देकर थ्रम्बोलाइज किया गया। महज 10 मिनट के भीतर मरीज को काफी राहत महसूस हुई। इसके बाद दोबारा कराई गई ईसीजी जांच में रिपोर्ट सामान्य पाई गई, जिससे मरीज की स्थिति स्थिर हो गई।
कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. यूसुफ अंसारी ने बताया कि मरीज को तीन दिन पहले माइनर हार्ट अटैक आया था, लेकिन सीने के सामान्य दर्द की तरह समझकर उन्होंने हृदय से जुड़ी जांचें नहीं कराईं। समय पर अस्पताल पहुंचने और इमरजेंसी में तुरंत इलाज मिलने से बड़ा खतरा टल गया। उन्होंने बताया कि स्टेमी कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पतालों में दिल के मरीजों के लिए त्वरित इलाज की व्यवस्था उपलब्ध है।
इलाज के बाद मरीज को आगे की देखभाल और विस्तृत उपचार के लिए उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करने की सलाह देकर छुट्टी दे दी गई। इस सफल इलाज में ईएमओ डॉ. सौरभ सिंह, कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. यूसुफ अंसारी, चीफ फार्मासिस्ट डीएस त्यागी और रेजिडेंट डॉ. हबीब उर रहमान की अहम भूमिका रही।



