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उत्तर प्रदेश की शराब नीति बनी राष्ट्रीय मिसाल, कई राज्य कर रहे हैं अध्ययन

लखनऊ, जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तैयार की गई शराब नीति न केवल राजस्व वृद्धि पर केंद्रित है, बल्कि इसमें पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार, अवैध शराब पर प्रभावी नियंत्रण और उपभोक्ता हितों को भी समान महत्व दिया गया है। इसका परिणाम है कि अब यूपी देश के अग्रणी राज्य के रूप में excise revenue में शामिल हो चुका है।

एक्साइज आयुक्त आदर्श सिंह ने बताया कि पिछले दो वर्षों में कई राज्यों के एक्साइज विभागों के अधिकारी उत्तर प्रदेश का दौरा कर इस नीति को समझने और अपने राज्यों में लागू करने की संभावनाओं का अध्ययन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “इस दौरान अधिकारियों ने यूपी के एक्साइज आयुक्त और विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। बैठक में यह समझने पर जोर दिया गया कि नीति निर्माण, ई-गवर्नेंस, लाइसेंसिंग प्रक्रिया और मॉनिटरिंग तंत्र को कैसे मजबूत किया गया जिससे लगातार राजस्व वृद्धि सुनिश्चित हो सके। कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों ने यूपी की नीति को व्यावहारिक और राजस्व उन्मुख बताते हुए सराहा। कई राज्य अब यूपी की नीति से प्रेरित होकर अपनी एक्साइज व्यवस्था में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं।”

राज्य दौरे के दौरान विभिन्न राज्यों के अधिकारियों ने राज्य की डिस्टिलरीज और शराब दुकानों का भी निरीक्षण किया। इसका उद्देश्य यह जानना था कि उत्पादन से लेकर बिक्री तक किस प्रकार निगरानी तंत्र लागू किया गया है और अवैध गतिविधियों पर कैसे नियंत्रण रखा जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विशेष रूप से यूपी के डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, ई-लॉटरी के माध्यम से दुकान आवंटन, बारकोडिंग और स्टॉक मैनेजमेंट सिस्टम की सराहना की। इन पहलों ने न केवल राजस्व वृद्धि सुनिश्चित की है, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण भी प्रदान किया है।

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