महायूति में दरार? पिंपरी-चिंचवड़ में अजित पवार के तीखे बयान से ‘काका–भतीजे’ की एकजुटता के कयास तेज

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता अजित पवार ने पिंपरी–चिंचवड़ में दिए अपने बयानों से महायुति सरकार के भीतर मतभेदों के संकेत और तेज कर दिए हैं। पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (पीसीएमसी) चुनाव से ठीक पहले उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर परोक्ष निशाना साधते हुए भ्रष्टाचार और ठेके प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए।
अजित पवार ने आरोप लगाया कि पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया में “रिंग” बनाकर भारी भरकम रकम की लूट की गई और सत्ता के नशे में बीजेपी का रवैया अहंकारी हो गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिंपरी-चिंचवड़ में वसूली में बीजेपी से जुड़े लोगों की भूमिका है और उनके पास इसके प्रमाण मौजूद हैं।
बिना नाम लिए उन्होंने बीजेपी विधायक महेश लांडगे पर भी परोक्ष टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि कुछ व्यक्तियों की संपत्ति अचानक कई गुना कैसे बढ़ गई और इसकी आय का स्रोत क्या है। उन्होंने कहा कि शहर में “दिनदहाड़े लुटेरों का गिरोह” सक्रिय है।
काका–भतीजे की फिर से नज़दीकियाँ?
पीसीएमसी चुनाव से पहले अजित पवार अपने चाचा और एनसीपी संस्थापक शरद पवार के साथ आए हैं। पार्टी विभाजन के बाद यह पहली बार होगा जब दोनों गुट स्थानीय निकाय चुनाव में साथ लड़ेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुणे और उसके आसपास के निकाय चुनाव दोनों धड़ों के लिए अपनी परंपरागत पकड़ बनाए रखने की बड़ी परीक्षा हैं, जबकि बीजेपी राज्यभर में अपने संगठन का विस्तार कर रही है।
माना जा रहा है कि अजित पवार के हालिया तीखे हमले बीजेपी को पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र में दूरी बनाए रखने का संकेत भी हो सकते हैं। स्थानीय निकाय चुनाव में जहां बीजेपी ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ गठबंधन किया है, वहीं अजित पवार की एनसीपी को अपने दम पर संघर्ष करना पड़ा और बाद में उन्होंने शरद पवार गुट से हाथ मिलाया।
सिंचाई घोटाले का संदर्भ फिर चर्चा में
इसी बीच चर्चित महाराष्ट्र सिंचाई घोटाले का मुद्दा भी फिर उछला है। 2012 के आर्थिक सर्वेक्षण के बाद सामने आए आरोपों में कहा गया था कि हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद सिंचाई क्षमता में बेहद कम बढ़ोतरी हुई। उस अवधि (1999–2009) में अजित पवार राज्य के सिंचाई मंत्री थे। हालांकि इस मामले की जांच और आरोपों पर राजनीतिक घमासान लंबे समय से जारी है।
पीसीएमसी चुनाव से पहले बढ़ती गतिविधियाँ और बयानबाज़ी इस बात का संकेत हैं कि राज्य की राजनीतिक बिसात पर नई सियासी समीकरण बनने की संभावनाएँ और अटकलें तेज हो चुकी हैं।



