सियासत

धनंजय ने बृजेश सिंह को फिर छेड़ा, यूपी में तय है एक और गैंगवार?

पूर्वांचल में होगा एक और गैंगवार, अब आमने सामने होंगे ये दोनों राजपूत बाहुबली

पूर्वांचल की राजनीति और अपराध की दुनिया को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान सामने आया है. जौनपुर से पूर्व बाहुबली सांसद धनंजय सिंह ने यूपी तक को दिए एक पॉडकास्ट में दावा किया है कि बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी की आपसी दुश्मनी असल नहीं थी. उनके मुताबिक, दोनों का एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा होना केवल जनता के सामने बनाया गया एक नाटक था. धनंजय सिंह ने पॉडकास्ट में कहा कि अगर सच में दोनों के बीच खून-खराबे वाली दुश्मनी होती, तो वे कभी न कभी आमने-सामने जरूर आते. लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ.

धनंजय सिंह ने दावा किया है कि ये दोनो लोगों को भड़काने, इलाके में डर बनाए रखने और अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र को मजबूत करने के लिए यह विरोध दिखाया जाता था. पूर्वांचल में लंबे समय तक बाहुबल और भय का असर राजनीति का बड़ा हथियार रहा है. धनंजय सिंह के अनुसार, बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी की कथित दुश्मनी से क्षेत्र में तनाव और डर का माहौल बना रहता था. लोग खुद को किसी न किसी खेमे में बांटकर देखने लगते थे. दोनों पक्षों का राजनीतिक और सामाजिक दबदबा कायम रहता था. यानी की दुश्मनी असल में नहीं, बल्कि मैसेजिंग का टूल थी.

धनंजय सिंह का यह बयान कोई नया नहीं है. इससे पहले यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी सार्वजनिक तौर से यह कह चुके हैं कि पूर्वांचल के कई बाहुबली नेताओं की दुश्मनियां वास्तविक कम और रणनीतिक ज़्यादा थीं. राजभर के बयान और अब धनंजय सिंह के खुलासे ने इन दावों को और बल दे दिया है. इन बयानों के बाद बड़ा सवाल यह है कि क्या पूर्वांचल में वर्षों तक दिखाई गई गैंगवार की कहानियां जनता को भ्रमित करने का जरिया था. क्या डर के सहारे राजनीति और अपराध दोनों को साधा गया? और क्या अब इन कथाओं का सच धीरे-धीरे सामने आ रहा है?

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब योगी सरकार लगातार माफिया-मुक्त यूपी का दावा कर रही है. पुराने बाहुबली नेटवर्क को तोड़ने की बात हो रही है और पूर्वांचल की राजनीति नए सामाजिक समीकरणों की ओर बढ़ रही है. ऐसे में धनंजय सिंह का यह खुलासा केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि पूर्वांचल की राजनीति को नए सिरे से समझने का संकेत भी माना जा रहा है.

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