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एआई के ज़रिए फर्जी वीडियो बनाकर फैलाने का आरोप: पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू के ‘डीपफेक’ मामले में मुजफ्फरपुर से एक व्यक्ति गिरफ्तार

बिहार पुलिस ने डिजिटल भ्रामक सूचना और डीपफेक सामग्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मुज़फ्फरपुर ज़िले से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के फर्जी वीडियो और ऑडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए।

गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान मुझफ्फरपुर के बोचहां क्षेत्र निवासी प्रमोद कुमार राज के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार उसने एआई टूल्स की मदद से दोनों शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों की आवाज़ और छवि की नकल करते हुए डीपफेक सामग्री तैयार की और उसे वायरल किया।

मुज़फ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 2 जनवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एआई तकनीक के माध्यम से बनाए गए संपादित वीडियो और ऑडियो के प्रसार की सूचना मिली थी। इन सामग्रियों का उद्देश्य लोगों को गुमराह करना और सर्वोच्च संवैधानिक पदों की गरिमा एवं विश्वसनीयता को ठेस पहुँचाना बताया गया है।

पुलिस ने कहा कि एआई-निर्मित इस फर्जी सामग्री के जरिए आम जनता में भ्रम फैलाने, लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने और सामाजिक सौहार्द व क़ानून-व्यवस्था भंग करने की कोशिश की गई। अधिकारियों ने यह भी आशंका जताई कि ऐसे कंटेंट का उपयोग अफवाह, राष्ट्रविरोधी भावनाएं भड़काने और अशांति फैलाने के लिए भी किया जा सकता था।

एआई का दुरुपयोग कर गढ़े गए वीडियो

आधिकारिक जानकारी के अनुसार आरोपी प्रमोद कुमार राज ने एआई टूल्स का दुरुपयोग करते हुए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम, तस्वीरों और आवाज़ की नकल कर फर्जी वीडियो और ऑडियो तैयार किए और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया ताकि उनकी पहुँच अधिकतम हो सके। विशेष टास्क फोर्स द्वारा की गई छापेमारी में उससे वह मोबाइल उपकरण भी बरामद किया गया, जिसका उपयोग इन डीपफेक सामग्री के निर्माण और प्रसार में किया गया था।

कानूनी कार्रवाई जारी

आरोपी के खिलाफ औपचारिक मामला दर्ज कर लिया गया है और पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है। पुलिस उसके आपराधिक इतिहास की भी पड़ताल कर रही है ताकि यह पता चल सके कि वह पूर्व में भी साइबर अपराधों में शामिल रहा है या नहीं।

यह गिरफ्तारी इस बात का स्पष्ट संदेश है कि जनरेटिव एआई तकनीक का दुरुपयोग कर फर्जी और भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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