‘नेशन फर्स्ट’ पहल के तहत दो करोड़ से अधिक विद्यार्थियों की ऐतिहासिक सहभागिता
मुंबई, जनवरी 2026 : गणतंत्र दिवस के अवसर पर ‘नेशन फर्स्ट’ पहल के अंतर्गत महाराष्ट्र ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य भर के स्कूलों में एक साथ देशभक्ति गीतों पर सामूहिक ड्रिल का आयोजन कर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने जानकारी दी कि इस आयोजन को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता दी गई है।
इस भव्य आयोजन में महाराष्ट्र के सभी संभागों से एक लाख स्कूलों के दो करोड़ से अधिक विद्यार्थियों ने एक ही समय पर अनुशासित और समन्वित ड्रिल प्रस्तुत की। इस दौरान लगभग सात लाख शिक्षक भी सक्रिय रूप से शामिल रहे। ध्वजारोहण के बाद आयोजित इस सामूहिक अभ्यास ने राज्य भर में देशभक्ति, एकता और अनुशासन का अद्भुत संदेश दिया।
यह अभिनव पहल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार की संकल्पना पर आधारित थी, जिसे स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक लागू किया गया। विद्यार्थियों ने बीते कई महीनों से इस ड्रिल का अभ्यास किया था। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सभी विद्यालयों को 14 मिनट का प्रशिक्षण वीडियो उपलब्ध कराया गया, जिससे राज्यभर में एक समान और सटीक प्रस्तुति संभव हो सकी।
इसके अतिरिक्त, छत्रपति संभाजीनगर जिले में जिला स्तर पर किए गए इसी प्रकार के आयोजन को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया है।
कार्यक्रम की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए दादाजी भुसे ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना को मजबूत करना, उनमें देशप्रेम, अनुशासन और सामूहिकता के संस्कार विकसित करना है। आयोजन को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने में जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य सेवाओं, अग्निशमन विभाग, स्वयंसेवी संगठनों और शिक्षा प्रेमियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि अब राज्य के सभी माध्यमों, प्रबंधन और भाषाओं के स्कूलों में हर शनिवार देशभक्ति गीतों पर सामूहिक ड्रिल नियमित रूप से आयोजित की जाएगी।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे और राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों को बधाई दी। कार्यक्रम की सफल क्रियान्वयन में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव रंजीतसिंह देओल, आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह, सभी जिलाधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नगर आयुक्त, विभिन्न विभागों के अधिकारी, प्रधानाचार्य, शिक्षक, अभिभावक और नागरिकों का विशेष योगदान रहा।




