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रूस में 50 लाख भारतीय कुशल कामगारों की संभावित मांग, व्यापार व एफटीए वार्ताओं में नई रफ़्तार

भारत और रूस के बीच आर्थिक साझेदारी एक नए मोड़ पर खड़ी है। रूसी उद्योगपतियों और सरकारी संस्थानों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि रूस को तत्काल 50 लाख कुशल मजदूरों की जरूरत है—एक ऐसी मांग जिसे भारत अपने विशाल स्किल्ड वर्कफोर्स के माध्यम से पूरा कर सकता है। यह जानकारी रूस के उद्योगपतियों और उद्यमियों के संघ (RSPP) के वाइस प्रेसिडेंट सर्गेई क्रास्निलनिकोव ने नई दिल्ली में हुए इंडिया-रशिया बिज़नेस फोरम के दौरान साझा की।
रूस को भारतीय स्किल्ड वर्कफोर्स की सीधी ज़रूरत
क्रास्निलनिकोव के अनुसार, रूसी कंपनियां भारतीय श्रमिकों को नियुक्त करने में रुचि दिखा रही हैं। उन्होंने बताया:
“रूस को विदेशों से 50 लाख श्रमिकों की जरूरत है, और भारत इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए सबसे उपयुक्त व बड़ा स्रोत है।”
उन्होंने कहा कि रूसी कंपनियों के लिए भारतीय वर्कफोर्स तक सीधी पहुंच बनाने की कोशिश जारी है।
पुतिन का निर्देश: भारतीय सामान का आयात बढ़ाएं
क्रास्निलनिकोव ने खुलासा किया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूसी कंपनियों को भारत से आयात बढ़ाने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
वर्तमान में रूस भारत को जितना निर्यात करता है, उसके मुकाबले 10 गुना कम आयात करता है—व्यापार संतुलन असमान है।
यह निर्देश दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग का संकेत देता है।
FTA बातचीत को अंतिम रूप देने की दौड़
भारत और रूस मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर तेजी से काम कर रहे हैं।
•नवंबर में औपचारिक चर्चा शुरू हुई थी
•फरवरी में अगले चरण की बैठक होगी
•प्रमुख भारतीय उत्पादों पर टैरिफ कम करने की दिशा में कोशिशें जारी हैं
विशेषकर कपड़ा उद्योग पर 12% तक का टैरिफ कम होना भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
लॉजिस्टिक्स चुनौतियों को सुलझाने की दिशा में काम
क्रास्निलनिकोव ने परिवहन और लॉजिस्टिक्स को सबसे बड़ी बाधा बताया।
•चेन्नई से व्लादिवोस्तोक के बीच FESCO कंटेनर लाइन शुरू करने का प्रस्ताव प्रगति पर है।
•इस रूट का उद्देश्य:
•रूस को भारतीय सामान उपलब्ध करवाना
•व्लादिवोस्तोक पोर्ट खाली न जाना
उन्होंने कहा कि रूस को सिर्फ कोयला आयात ही नहीं करना—बल्कि भारत से विविध वस्तुओं की आवश्यकता है।
भारतीय युवाओं के लिए रोज़गार का बड़ा अवसर
साल्टेक्स ग्रुप के प्रेसिडेंट मनीष कुमार ने कहा कि भारत का कुशल वर्कफोर्स रूस की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने बताया कि:
•15 दिसंबर से भारत में एक प्रतिष्ठित रूसी विश्वविद्यालय के साथ मिलकर वेल्डरों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो रहा है।
•प्रशिक्षण रूसी मशीनों पर होगा और तकनीशियनों को रूसी भाषा का तकनीकी ज्ञान भी दिया जाएगा।
•आगे रोबोटिक्स, ड्रोन और अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की योजना है।
मनीष कुमार का कहना है:
“भारत के पास कुशल युवा हैं और रूस के पास बड़ी मांग—यह दोनों देशों के लिए ‘win-win’ स्थिति है।”
FTA होने पर खुलेंगे 5 देशों के बाजार
साल्टेक्स ग्रुप ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस सिर्फ एक देश नहीं—बल्कि 5 देशों का आर्थिक संघ है।
FTA लागू होने से भारतीय निर्यातकों के लिए यह एक विशाल बाज़ार बन जाएगा।

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