इंदौर जलकांड पर हाईकोर्ट में याचिका: प्रभावितों के लिए नि:शुल्क उपचार और शुद्ध पेयजल आपूर्ति की मांग

इंदौर/भोपाल: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में भगीरथपुरा क्षेत्र में हुई पानी प्रदूषण की घटना को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका में शहरवासियों के लिए तुरंत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने और दूषित पानी से बीमार हुए लोगों के लिए नि:शुल्क चिकित्सा उपचार की मांग की गई है। बताया गया है कि भगीरथपुरा क्षेत्र में पिछले दो–तीन दिनों से घरों में दूषित पानी की आपूर्ति हो रही थी, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े।
इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष रितेश इनानी ने बताया कि याचिका में प्रशासन और संबंधित विभागों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रभावित लोगों का बिना किसी शुल्क के इलाज सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि यह मामला सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य और जीवन के अधिकार से जुड़ा है।
घटना से जुड़े आंकड़ों पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार दूषित पानी पीने से अब तक कम से कम 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर केवल चार मौतों की पुष्टि की गई है। करीब 1,500 लोग अस्पताल में भर्ती बताए जा रहे हैं, जिनमें से 26 मरीज आईसीयू में उपचाराधीन हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर मरीजों से मुलाकात की और मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की। उन्होंने कहा कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है—दो अधिकारियों को निलंबित और एक को बर्खास्त किया गया है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि पानी आपूर्ति से संबंधित शिकायतों को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति आईएएस नवजीवन पंवार के निर्देशन में कार्य करेगी, जिसमें अधीक्षण अभियंता प्रदीप निगम और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय शामिल हैं। समिति को घटना के कारणों और जिम्मेदारियों की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी के लिए निर्धारित की है। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह मृतकों और घायलों का पूरा विवरण तथा अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी प्रस्तुत करे। यह मामला न केवल पेयजल व्यवस्था बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।



