फर्मी टेलिस्कोप के डेटा पर नई स्टडी ने वैज्ञानिकों को दी संभावित उम्मीद

ब्रह्मांड के कुल द्रव्यमान का लगभग 85% हिस्सा, लेकिन अब तक अदृश्य और अनजाना। वैज्ञानिक दशकों से इसकी मौजूदगी को समझने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि यह प्रकाश को न तो उत्सर्जित करता है और न ही अवशोषित, फिर भी इसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति ब्रह्मांड की संरचना को नियंत्रित करती है।
अब, लगभग एक सदी बाद पहली बार, वैज्ञानिकों के हाथ डार्क मैटर के सीधे संकेत लगने का दावा किया जा रहा है।
फर्मी टेलिस्कोप डेटा में मिला सुराग
टोक्यो विश्वविद्यालय के एस्ट्रोफिजिसिस्ट प्रोफेसर टोमोनोरी टो्टानी और उनकी टीम ने NASA के Fermi Gamma-ray Space Telescope द्वारा रिकॉर्ड किए गए डेटा का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि मिल्की वे गैलेक्सी के केंद्र से निकलने वाली गामा किरणों के पैटर्न और डार्क मैटर हेलो की आकृति में असामान्य समानता है।
प्रो. टोटानी के अनुसार—
“यह खोज डार्क मैटर की प्रकृति समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है।
यदि यह सिद्ध होता है, तो मानव इतिहास में पहली बार हम वास्तव में डार्क मैटर ‘देख’ रहे होंगे।”
कैसे मिल सकता है डार्क मैटर का प्रमाण?
हालांकि डार्क मैटर प्रकाश उत्पन्न नहीं करता, लेकिन सिद्धांत कहता है कि डार्क मैटर कण जब आपस में टकराते हैं और नष्ट होते हैं, तो वे गामा रे सहित कुछ अन्य कण उत्पन्न कर सकते हैं। अब जो सिग्नल मिले हैं, वे इसी प्रकार की संभावित ‘एनिहिलेशन सिग्नेचर’ से मेल खाते हैं।
यदि यह परिणाम सही सिद्ध होता है —
डार्क मैटर स्टैंडर्ड मॉडल में मौजूद नहीं किसी नए कण का रूप होगा
यह कण प्रोटॉन से कम से कम 500 गुना भारी हो सकते हैं
आधुनिक खगोलभौतिकी और पार्टिकल फिजिक्स के लिए यह सबसे बड़ी खोजों में से एक होगी
अभी पुष्टि बाकी — स्वतंत्र विश्लेषण जरूरी
हालांकि यह दावा उत्साहजनक है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे अभी स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच और सत्यापन की आवश्यकता है। केवल तब ही इसे डार्क मैटर की पहली सीधी पहचान माना जा सकेगा।
क्या मानवता ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य हल करने के करीब है?
फिलहाल उत्तर अभी अधूरा है। लेकिन इस शोध ने वह दरवाज़ा जरूर खोल दिया है, जिसकी तलाश वैज्ञानिक 100 साल से कर रहे थे।
यदि अगली स्टडीज़ भी यही संकेत दोहराती हैं —
डार्क मैटर अब वैज्ञानिक कल्पना नहीं, प्रमाणित वास्तविकता बन सकता है।



