‘उमेद’ योजना के सहारे रेवणगांव की सायली शिंदे ने खड़ा किया Marble Organics, 5 महिलाओं को मिला रोजगार

महाराष्ट्र सरकार की महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका योजनाओं का लाभ उठाकर रेवणगांव की सायली राजेंद्र शिंदे ने अपनी मेहनत और नवाचार से आयुर्वेदिक व हर्बल कॉस्मेटिक ब्रांड “Marble Organics” को नई पहचान दिलाई है। UMED (महाराष्ट्र स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन) के सहयोग से शुरू हुआ यह उद्यम आज ग्रामीण महिला उद्यमिता की प्रेरक मिसाल बन गया है।
इश्वरपुर की मूल निवासी और विवाह के बाद रेवणगांव में रहने वाली सायली शिंदे ने अपने पति राजेंद्र शिंदे, जो इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं, के साथ कोविड-19 महामारी के दौरान सैनिटाइजर निर्माण से अपने व्यवसाय की शुरुआत की थी। इसी अनुभव ने उन्हें आगे बढ़ते हुए ब्यूटी और हर्बल कॉस्मेटिक सेक्टर में उतरने का आत्मविश्वास दिया।
शुरुआत में Marble Organics ने केवल एक-दो उत्पाद, जैसे जेल, से काम शुरू किया था। लेकिन सायली की दूरदृष्टि और बाजार की समझ ने इसे तेजी से आगे बढ़ाया। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ाव के बाद उन्होंने अपना “हिरकणी स्वयं सहायता समूह” बनाया, जिसके जरिए उन्हें दो चरणों में ₹7 लाख की वित्तीय सहायता मिली। इसी पूंजी से उन्होंने उत्पादन यूनिट, कच्चे माल और मार्केटिंग पर निवेश कर कारोबार का विस्तार किया।
आज Marble Organics के तहत 12 प्रकार के प्राकृतिक कॉस्मेटिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें फेस वॉश, डे-नाइट क्रीम, लिप बाम और हर्बल जेल प्रमुख हैं। सायली का कहना है कि उनके सभी उत्पाद पूरी तरह प्राकृतिक और केमिकल-फ्री हैं। इसके लिए कच्चा माल रत्नागिरी, मुंबई, गुजरात और दिल्ली जैसे स्थानों से मंगाया जाता है।
सायली ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पति और ससुराल के सहयोग के साथ-साथ UMED योजना को दिया। उन्होंने बताया कि इस योजना से मिली आर्थिक सहायता ने न केवल यूनिट खड़ी करने में मदद की, बल्कि उत्पादन क्षमता और बाजार पहुंच भी बढ़ाई।
यह उद्यम अब केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का केंद्र भी बन चुका है। वर्तमान में यूनिट में करीब 5 महिलाएं कार्यरत हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। सायली का लक्ष्य भविष्य में 50 महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।
रेवणगांव जैसे ग्रामीण क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद Marble Organics ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और अपनी आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन बाजार में मजबूत पहचान बनाई है। सायली ने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और ब्रांड सपोर्ट सर्विसेज के माध्यम से भी अपने कारोबार को नई दिशा दी है।
सायली शिंदे की यह सफलता कहानी इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, परिवार का सहयोग और दृढ़ संकल्प महिलाओं को ग्रामीण भारत से राष्ट्रीय स्तर की उद्यमी बना सकता है। आज वह अपने गांव की कई महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और प्रेरणा की प्रतीक बन चुकी हैं।



