देहरादून हॉरर: नस्लीय टिप्पणी और हमले में त्रिपुरा के छात्र की मौत, पाँच आरोपी गिरफ्तार, एक फरार
देहरादून में नस्लीय भेदभाव और हिंसक हमले की एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। त्रिपुरा के 24 वर्षीय एंजेल (अंजेल) चकमा, जो जिज्ञासा विश्वविद्यालय में एमबीए अंतिम वर्ष के छात्र थे, नस्लीय टिप्पणियों के बाद हुए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। करीब दो सप्ताह तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 24 दिसंबर की तड़के उनकी मृत्यु हो गई।
यह घटना 9 दिसंबर 2025 को सेलाकुई क्षेत्र में शाम 6 से 7 बजे के बीच उस समय हुई जब एंजेल अपने छोटे भाई माइकल चकमा के साथ किराने का सामान खरीदने निकले थे। रास्ते में कुछ नशे में धुत युवकों ने उनके शारीरिक रूप-रंग को लेकर नस्लीय और आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करनी शुरू कर दीं। उन्हें “नेपाली”, “चीनी”, “चिंकी” और “मोमोज” जैसे अपमानजनक शब्दों से पुकारा गया। जब भाइयों ने इसका विरोध किया तो बात जल्द ही हिंसा में बदल गई।
आरोप है कि हमलावरों ने माइकल के सिर पर धातु के कड़े से हमला किया, जबकि एंजेल को तेज धारदार हथियार से गर्दन और पेट में कई वार किए गए। दोनों को जान से मारने की धमकी भी दी गई। एंजेल को गंभीर हालत में ग्राफिक एरा अस्पताल, देहरादून में भर्ती कराया गया, जहाँ उन्हें ICU में रखा गया। लंबी इलाज प्रक्रिया के बाद भी वे जीवन नहीं बचा सके।
एंजेल के पिता, जो सीमा सुरक्षा बल (BSF) में हेड कॉन्स्टेबल हैं और पूर्वोत्तर में तैनात हैं, उनका पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए त्रिपुरा ले गए।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देशन में सेलाकुई थाना क्षेत्र में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने सूचना तंत्र सक्रिय किया, लगातार दबिश दी और 14 दिसंबर को पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपी:
- अविनाश नेगी (25), शंकरपुर, सहसपुर
- शौर्य राजपूत (18), धुलकोट, प्रेमनगर
- सूरज खवास (18), मूल निवासी मणिपुर, वर्तमान में पटेल नगर
- सुमित (25), तिलवारी, देहरादून
- आयुष बडोनी (18), बाई खाल, सेलाकुई
एक अन्य आरोपी, जो नेपाली नागरिक बताया जा रहा है, गिरफ्तारी से पहले सीमा पार कर फरार हो गया। उसकी तलाश जारी है। घटना के बाद आरोपियों के खिलाफ अब हत्या की धारा जोड़ी गई है।
आक्रोश और डर
हमले से बच गए माइकल चकमा ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि आरोपी “प्रभावशाली परिवारों” से हैं और उन्हें पहले भी धमकाया गया था। इस घटना ने एक बार फिर पूर्वोत्तर के छात्रों के साथ होने वाले नस्लीय भेदभाव के मुद्दे को उजागर कर दिया है। पूरे पूर्वोत्तर में इस घटना के खिलाफ गुस्सा और शोक का माहौल है।



