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दूरदर्शन लखनऊ के वरिष्ठ अधिकारी पर संपत्ति छिपाने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, कार्रवाई पर उठे सवाल

दूरदर्शन केंद्र, लखनऊ में कार्यक्रम प्रमुख एवं उप निदेशक के पद पर तैनात श्री आत्म प्रकाश मिश्र को लेकर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। वरिष्ठ पत्रकार प्रेम कान्त तिवारी द्वारा प्रसार भारती एवं दूरदर्शन के शीर्ष अधिकारियों को भेजी गई विस्तृत शिकायत के बावजूद अब तक किसी ठोस कार्रवाई के अभाव ने प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि श्री आत्म प्रकाश मिश्र की पत्नी श्रीमती शोभा मिश्र के नाम से बख्शी का तालाब क्षेत्र के शिवपुरी गांव के पास खेत और फार्म हाउस है, जिसका उल्लेख लंबे समय तक उनकी चल-अचल संपत्ति की वार्षिक घोषणा में नहीं किया गया। यह तथ्य जांच के दायरे में आने योग्य बताया गया है। साथ ही, शिकायतकर्ता का दावा है कि श्री मिश्र का रहन-सहन और जीवन-शैली उनकी ज्ञात वैध आय से कहीं अधिक प्रतीत होती है।

पत्र में यह भी उल्लेख है कि श्री मिश्र अपने मूल सरकारी दायित्वों में अपेक्षाकृत कम रुचि लेते हैं, जबकि बाहरी गतिविधियों, रसूखदार व्यक्तियों से संपर्क, यश और मंचीय पहचान अर्जित करने में अधिक सक्रिय रहते हैं। आरोप है कि वे विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में मंच संचालन के माध्यम से भारी मानदेय प्राप्त करते रहे हैं, जो एक सरकारी अधिकारी के लिए आचरण नियमों के विरुद्ध तथा संभावित रूप से दंडनीय है।

दूरदर्शन केंद्र लखनऊ में सामान्यतः किसी अधिकारी का कार्यकाल चार वर्ष का होता है, लेकिन श्री मिश्र पर भ्रष्टाचार और

यौन उत्पीड़न जैसे आरोपों के बावजूद वे लगभग सोलह वर्षों से इसी केंद्र में तैनात हैं। जानकारी के अनुसार, उनके दो बार स्थानांतरण आदेश भी जारी किए गए, जिन्हें बाद में निरस्त कर दिया गया।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिन अधिकारियों द्वारा श्री मिश्र को मंच संचालन के कार्य सौंपे जाते हैं, वे इस बात से अवगत हैं कि यह गतिविधि नियमों के विपरीत है। इसके बावजूद, उन्हें आमंत्रित कर विशेष आवभगत के माध्यम से प्रभाव में लेने का प्रयास किया जाता रहा है।

प्रेम कान्त तिवारी के अनुसार, उन्होंने 30 जनवरी 2024 को पहली बार प्रसार भारती के सीईओ को इन कथित अनियमितताओं से अवगत कराया था। इसके बाद अप्रैल 2025 में महानिदेशक, दूरदर्शन से भी इस विषय पर चर्चा हुई। काफी विलंब के बाद 24 सितंबर 2025 को जांच अधिकारी द्वारा उनसे साक्ष्य प्राप्त किए गए, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जांच की प्रगति या किसी निष्कर्ष की कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि यदि इस मामले में समयबद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे प्रसार भारती जैसी सार्वजनिक सेवा प्रसारण संस्था की साख पर गंभीर आघात पहुंचेगा। उन्होंने मांग की है कि शीर्ष अधिकारी स्वयं लखनऊ आकर तथ्यों की प्रत्यक्ष जांच करें और दोष सिद्ध होने की स्थिति में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

Disclaimer – द न्यूज़ स्टेट डॉट कॉम द्वारा इन आरोपों का स्वतंत्र सत्यापन नहीं किया गया है। किसी भी सरकारी संस्था या अधिकारी के विरुद्ध कोई उत्तरदायित्व नहीं लिया जाता। सभी आरोप जांच एवं विधिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

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