विकसित भारत के लिए महिलाओं की 50% भागीदारी जरूरी: नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में बोले सीएम फडणवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भारत तब तक विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता, जब तक देश के विकास में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित नहीं होती। उन्होंने यह बात ‘नारी शक्ति वंदन महिला सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम का आयोजन नारी शक्ति विचार मंच द्वारा किया गया, जिसमें राजनीति, शिक्षा, कला और सामाजिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन विधेयक महिलाओं के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक बदलाव लाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण यह कानून आगे बढ़ सका, जबकि इससे पहले कई सरकारों के प्रयास बहुमत के अभाव में सफल नहीं हो पाए थे।
फडणवीस ने विश्वास जताया कि 2029 तक लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या मौजूदा 73 से बढ़कर करीब 273 तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते यह कदम नहीं उठाया जाता तो यह प्रक्रिया 2029 या 2034-39 तक टल सकती थी।
मुख्यमंत्री ने जनगणना और परिसीमन को लेकर उठ रही आशंकाओं पर कहा कि कोविड महामारी के कारण 2021 की जनगणना में देरी हुई, लेकिन सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर इस कानून को लागू करने और जल्द परिसीमन प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘लखपति दीदी’ और शिक्षा विस्तार जैसी योजनाओं ने महिलाओं को नई पहचान दी है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में पहली बार महिलाएं मुख्य सचिव, डीजीपी और मुंबई नगर आयुक्त जैसे शीर्ष पदों तक पहुंची हैं, जबकि स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी 55 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
फडणवीस ने कहा कि पहले जहां कई जगह “प्रॉक्सी नेतृत्व” देखने को मिलता था, वहीं अब महिलाएं स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही हैं और प्रभावी नेतृत्व दे रही हैं। उन्होंने नागपुर AIIMS का उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में महिला छात्राओं ने 8 में से 6 गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की है।
उन्होंने कहा कि रक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान, विज्ञान, शिक्षा और प्रशासन जैसे हर क्षेत्र में महिलाएं उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। सही अवसर मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू सकती हैं।
कार्यक्रम में राजमाता जिजाऊ, रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और डॉ. आनंदीबाई जोशी जैसी प्रेरणादायी हस्तियों के जीवन पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं। विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। साथ ही नारी शक्ति वंदन बिल के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया।



