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जशक्राफ्ट को राष्ट्रीय पहचान: जशपुर की महिलाओं के हस्तनिर्मित बांस, चिन्ड, मिट्टी और लकड़ी के उत्पाद अब भारत के एयरपोर्ट पर

रायपुर, जनवरी 2026 : जशपुर जिले में महिलाओं को सशक्त बनाने और वन-आधारित आजीविकाओं को बढ़ावा देने के ऐतिहासिक प्रयास के तहत, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साई की उपस्थिति में, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने Rare Planet Organization और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों—जागरण, स्माइल आरती, राखी और मुस्कान—के बीच जशक्राफ्ट उत्पादों के विपणन हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस महत्वपूर्ण समझौते के तहत, जनजातीय महिलाओं द्वारा बांस, चिन्ड पत्तियों, मिट्टी और लकड़ी से बनाए गए हस्तनिर्मित उत्पाद, आभूषण और सजावटी वस्तुएं अब भारत के प्रमुख एयरपोर्ट पर Rare Planet के बिक्री आउटलेट्स में उपलब्ध होंगी। यह पहल स्थानीय स्वयं सहायता समूहों को स्थायी बाजार, उचित मूल्य और नियमित आय के अवसर प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री श्री साई ने इस अवसर पर कहा कि जशपुर की महिलाओं के लिए यह MoU निर्णायक उपलब्धि है। जशक्राफ्ट ब्रांड के माध्यम से जनजातीय महिलाओं की कला देशभर में पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल उत्पाद बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्म-सम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की नींव रखती है। सरकार का उद्देश्य वन और परंपरा आधारित आजीविकाओं को बड़े बाजारों से जोड़ना है, ताकि महिलाएं अपने गांव में रहते हुए गरिमामय जीवन यापन कर सकें।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह MoU ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के सिद्धांतों का प्रतीक है और जशपुर की जनजातीय महिलाओं को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम है।

पुस्तक लोकार्पण और उत्पाद सराहना
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साई ने जशक्राफ्ट पर आधारित विशेष पुस्तक का लोकार्पण किया। उन्होंने हस्तनिर्मित आभूषण और उत्पादों का अवलोकन किया और उनकी गुणवत्ता, कलात्मकता और नवाचार की सराहना की। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं मुख्यमंत्री की पत्नी और विधायक का स्वागत जशक्राफ्ट के पारंपरिक आभूषण पहनाकर किया, जो महिलाओं के सशक्तिकरण और स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक था।

जशक्राफ्ट का प्रमोशनल वीडियो भी जारी किया गया, जिससे ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले।

जशपुर की सांस्कृतिक विरासत से जन्मा ब्रांड
जशक्राफ्ट जशपुर जिले की समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जहां लगभग 65% आबादी जनजातीय समुदाय की है और वे बांस, चिन्ड पत्तियां, लकड़ी, मिट्टी और कांसा घास के उत्पाद बनाने में निपुण हैं। पहले, संगठित विपणन की कमी के कारण उनकी पहुंच सीमित थी।

जिले प्रशासन ने अब जशक्राफ्ट को आठ विकासखंडों में शिल्पकारों को जोड़ने वाला मजबूत प्लेटफॉर्म बना दिया है, जो पहचान, संरक्षण और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करता है।

इस पहल की केंद्रबिंदु जनजातीय महिला कारीगर हैं, जिनके हस्तनिर्मित, मशीन-मुक्त उत्पाद परंपरा, प्रकृति और आत्मनिर्भरता का संदेश देते हैं। जशक्राफ्ट एक स्थायी और गरिमामय आजीविका मॉडल के रूप में उभर रहा है, जो जशपुर को हस्तशिल्प के राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित कर रहा है।

यह फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की अगुवाई वाली पहल महिलाओं की आत्मनिर्भरता, वन-आधारित आजीविकाओं और स्थानीय उत्पादों के राष्ट्रीय बाजार में समेकन में मील का पत्थर साबित होगी।

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