होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए यूरोप की स्वतंत्र नौसैनिक मिशन योजना, अमेरिका से अलग रणनीति

ईरान संघर्ष के बाद वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर यूरोपीय देश एक बड़ी रणनीतिक पहल पर काम कर रहे हैं। ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में यूरोप होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र बहुराष्ट्रीय नौसैनिक मिशन की तैयारी कर रहा है, जो अमेरिका से अलग कमांड स्ट्रक्चर के तहत संचालित होगा। यह कदम ट्रांस-अटलांटिक सुरक्षा समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
योजना के मुताबिक यह मिशन युद्धविराम के बाद शुरू किया जाएगा और इसमें अमेरिका, इजरायल तथा ईरान जैसे सीधे संघर्षरत देशों को शामिल नहीं किया जाएगा। मिशन का मुख्य फोकस माइन क्लीयरेंस, नौसैनिक गश्त, एस्कॉर्ट ऑपरेशन और निगरानी तंत्र स्थापित करना होगा, ताकि वैश्विक शिपिंग कंपनियों का भरोसा बहाल हो सके। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने इसे पूरी तरह रक्षात्मक मिशन बताया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस यूरोपीय योजना के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं—पहला, संघर्ष के कारण जलडमरूमध्य में फंसे सैकड़ों व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना; दूसरा, ईरान द्वारा बिछाई गई कथित समुद्री सुरंगों को हटाने के लिए बड़े स्तर पर डी-माइनिंग ऑपरेशन चलाना; और तीसरा, भविष्य में व्यापारिक जहाजों के लिए स्थायी एस्कॉर्ट और सर्विलांस सिस्टम बनाना। यह मॉडल काफी हद तक लाल सागर में यूरोपीय संघ के Operation Aspides से प्रेरित माना जा रहा है।
इस मिशन में जर्मनी की संभावित भागीदारी को भी अहम माना जा रहा है। विदेशों में सैन्य तैनाती को लेकर परंपरागत सतर्क रुख रखने वाला बर्लिन इस बार नौसैनिक पोत और निगरानी क्षमता उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है, जिससे मिशन और मजबूत हो सकता है। साथ ही यूरोप ने भारत और चीन जैसे प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों से भी चर्चा शुरू की है, हालांकि उनकी भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है।
दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति का रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी लंबी बाधा का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर सीधा पड़ता है, खासकर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्धविराम के बाद भी लंबे समय तक पश्चिमी नौसैनिक मौजूदगी जरूरी हो सकती है, ताकि बीमा कंपनियों और शिपिंग ऑपरेटरों का भरोसा बना रहे।
यह यूरोपीय पहल वैश्विक सुरक्षा ढांचे में अमेरिकी नेतृत्व से आंशिक दूरी और यूरोप की रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है। आने वाले दिनों में यह मिशन वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिमी गठबंधनों की नई दिशा तय कर सकता है।



