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उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने शुरू की मखाना विकास योजना, पूर्वांचल के किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

उत्तर प्रदेश में मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने सोमवार को लखनऊ स्थित 19, गौतमपल्ली आवास पर प्रेसवार्ता कर मखाना विकास योजना की औपचारिक शुरुआत की।
उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तैयार कार्ययोजना को भारत सरकार ने स्वीकृत कर दिया है, जिसके तहत 158 लाख रुपये की राशि जारी की गई है। सीमित समय शेष रहने के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा दी गई यह स्वीकृति राज्य के किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तैयारी, तालाब निर्माण से लेकर प्रशिक्षण तक पूरी रूपरेखा तैयार
मंत्री सिंह ने कहा कि इस धनराशि से राज्य में कई गतिविधियां संचालित की जाएंगी, जिनमें शामिल हैं—
•मखाना खेती के लिए उपयुक्त तालाबों का चयन एवं निर्माण
•किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
•अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन
•बायर-सेलर मीट
•मखाना पवेलियन के माध्यम से प्रचार-प्रसार
•निर्यातकों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी
•राज्य एवं जनपद स्तर पर सेमिनार
उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मखाना” स्थापित करने की दिशा में कार्य शुरू किया जा रहा है, जो भविष्य में मखाना अनुसंधान, उत्पादन एवं प्रसंस्करण का प्रमुख केंद्र बनेगा।
पूर्वांचल बनेगा मखाना हब, किसानों की आय में होगी वृद्धि
मंत्री सिंह ने कहा कि मखाना अपने औषधीय गुणों एवं उच्च बाजार मूल्य के कारण सुपरफूड के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अब तक इसकी प्रमुख खेती बिहार में होती रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश के कई जिले इसके लिए अत्यंत उपयुक्त हैं।
उन्होंने बताया कि कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, बलिया, महाराजगंज, वाराणसी और बस्ती जिलों की जलवायु एवं जलभराव वाले क्षेत्र मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। जहां सिंघाड़ा खेती सफल है, वहां मखाना भी समान रूप से लाभदायक होगा।
अगले वित्तीय वर्ष से विभाग मखाना की खेती के क्षेत्र का विस्तार, गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री का उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन गतिविधियों को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।
आलू निकासी पर विपक्ष का भ्रम दूर, 99.35% निकासी पूरी
प्रेसवार्ता में मंत्री सिंह ने आलू निकासी की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि विभाग पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य कर रहा है। इस वर्ष की निकासी दर 99.35% है, जो पिछले वर्ष की 99.31% दर से अधिक है।
उन्होंने कहा कि 15 दिसम्बर तक शत-प्रतिशत निकासी पूरी होने की संभावना है और विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। विभाग जल्द ही प्रत्येक जनपद की निकासी का विस्तृत विवरण भी जारी करेगा।



