इंदौर ‘ज़हरीले पानी’ का खतरा: दूषित पानी से बना फॉर्मूला दूध पीने के बाद 6 महीने के बच्चे की मौत, मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका

इंदौर में दूषित पानी से फैल रही बीमारी का संकट गहराता जा रहा है। पिछले दिनों इलाज के दौरान कई लोगों की मौत के बाद अब छह महीने के एक शिशु की मृत्यु ने हालात को और गंभीर बना दिया है। आरोप है कि बच्चे ने जिस फॉर्मूला दूध का सेवन किया था, वह दूषित पानी से तैयार किया गया था। दूध पीने के बाद से ही बच्चे को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
मृतक बच्चे की मां साधना साहू ने बताया कि इलाके में लंबे समय से गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। उन्होंने कहा कि बच्चे को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा था, इसलिए वह फॉर्मूला दूध पिलाती थीं, जिसे पानी मिलाकर तैयार किया जाता था। मां के अनुसार, दूध पीने के बाद बच्चे की तबीयत लगातार बिगड़ती गई। उन्होंने बताया कि डॉक्टर की दवा के बावजूद बच्चे को तेज बुखार और उल्टी-दस्त होते रहे और 29 दिसंबर को उसकी मौत हो गई। यह बच्चा दंपति को 10 साल बाद हुआ था।
परिवार का कहना है कि उनकी 10 साल की बेटी भी इसी दूषित पानी के कारण बीमार है। स्थानीय लोगों और प्रभावित परिवारों का दावा है कि अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर चार मौतों की पुष्टि की गई है। करीब 1,500 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 26 मरीज आईसीयू में उपचाराधीन हैं।
सरकारी कोशिशें और कार्रवाई
मध्य प्रदेश सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए राहत उपाय शुरू किए हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की और बताया कि मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था सरकार की ओर से की जा रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में टैंकरों के जरिए नर्मदा जल उपलब्ध कराया जा रहा है तथा हर घर में क्लोरीन की गोलियां भी बांटी गई हैं। उन्होंने ludzi से उबला हुआ पानी पीने की अपील भी की।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर मरीजों से मुलाकात की और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में लोगों की स्क्रीनिंग की गई है और संदिग्ध मामलों का उपचार जारी है। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि जोनल अधिकारी शालिग्राम सिटोले और सहायक अभियंता योगेश जोशी को निलंबित कर दिया गया है, जबकि प्रभारी उप अभियंता शुभम श्रीवास्तव को बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है, जो पूरे प्रकरण की जांच करेगी।
दूषित पानी की आपूर्ति से जुड़ी यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि बुनियादी पेयजल सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।



