कर्तव्य पथ पर गूंजा महाराष्ट्र का सांस्कृतिक वैभव, ‘गणेशोत्सव’ झांकी ने मोहा देश-दुनिया ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से किया गया सम्मानित
नई दिल्ली, जनवरी 2026 : राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 77वां गणतंत्र दिवस भव्यता और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भारत की सैन्य शक्ति, ‘एकता में विविधता’ को दर्शाती आकर्षक झांकियाँ और अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ मुख्य आकर्षण रहीं। समारोह में महाराष्ट्र की ‘गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का प्रतीक’ विषय पर आधारित झांकी ने विशेष रूप से सभी का ध्यान आकर्षित किया। इसी अवसर पर अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
मुख्य गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी सहित अनेक केंद्रीय मंत्री और विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। परेड से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद राष्ट्रपति ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र प्रदान किया।
अंतरिक्ष में भारत का गौरव
पूर्व फाइटर पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला वर्ष 2020 से इसरो में प्रतिनियुक्ति पर हैं। उन्होंने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 20 दिवसीय ऐतिहासिक मिशन पूरा किया। वे चार दशकों बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय, तथा ISS की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने। असाधारण साहस और राष्ट्र के लिए विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
महाराष्ट्र की झांकी ने बिखेरा सांस्कृतिक रंग
परेड के दौरान महाराष्ट्र की झांकी ने राज्य की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक सामर्थ्य का भव्य प्रदर्शन किया। झांकी में लोकमान्य तिलक द्वारा प्रारंभ किए गए सार्वजनिक गणेशोत्सव आंदोलन को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त सामाजिक और आर्थिक शक्ति के रूप में दर्शाया गया। ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में महाराष्ट्र की समृद्ध परंपराओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
झांकी के अग्रभाग में ढोल बजाती महिला महाराष्ट्र की ऊर्जा का प्रतीक बनी, मध्य भाग में गणेश मूर्ति का निर्माण करते शिल्पकार को दर्शाया गया और पीछे की ओर अष्टविनायक मंदिरों की प्रतिकृति प्रस्तुत की गई। पारंपरिक नौवारी साड़ी पहनी महिलाओं की लेझीम टोली और गूंजते ढोल-ताशा की थाप ने कर्तव्य पथ को उत्सवमय कर दिया।
आत्मनिर्भरता और रोजगार का संदेश
झांकी के माध्यम से गणेशोत्सव से जुड़े मूर्तिकारों, सजावट कलाकारों और इससे जुड़े व्यापक आर्थिक तंत्र को दर्शाया गया। वर्ष 2025 से महाराष्ट्र सरकार द्वारा गणेशोत्सव को ‘राज्य उत्सव’ घोषित किए जाने के कारण इस झांकी का महत्व और भी बढ़ गया। सैन्य टुकड़ियों, स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों और अन्य राज्यों की झांकियों के बीच महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान ने अलग छाप छोड़ी।



