सुधार-प्रधान विकास के साथ 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था बनी वैश्विक मजबूती का उदाहरण

भारत की अर्थव्यवस्था ने 2025 में वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूती और सुधार-प्रधान विकास का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। वर्ष के अंत में जब अधिकांश वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं व्यापार तनाव, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और पूंजी प्रवाह की अस्थिरता से जूझ रही थीं, ऐसे समय में भारत ने स्थिरता और निरंतर विकास के साथ अपनी अलग पहचान बनाई। संरचनात्मक सुधारों, नीति निरंतरता और सक्रिय व्यापार रणनीतियों ने भारत की विकास यात्रा को महत्वपूर्ण गति प्रदान की।
2025 वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियों का वर्ष रहा। संरक्षणवादी नीतियां, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मुद्रा उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने न केवल दबावों का सामना किया, बल्कि सुधार-आधारित विकास की मजबूत रफ्तार भी बनाए रखी। इक्विटी बाजार के रिकॉर्ड उच्च स्तर, रुपये में उतार-चढ़ाव, नए व्यापार समझौते और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने लचीलापन और चपलता का परिचय दिया।
भारत के व्यापक आर्थिक संकेतक मजबूत रहे। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ भारत 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की जीडीपी 6.63 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान जताया है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही, जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे अधिक है। पहली तिमाही की वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही, जिससे पहले आधे वर्ष की औसत वृद्धि लगभग 8 प्रतिशत तक पहुंच गई।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने पूरे वर्ष के लिए 7 प्रतिशत या उससे अधिक वृद्धि का अनुमान जताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सुधार-प्रधान विकास, मजबूत नीतिगत क्रियान्वयन और भारतीय उद्यमशीलता की ऊर्जा का परिणाम बताया।
2025 में महंगाई पर नियंत्रण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। भारतीय रिजर्व बैंक ने इसे “गोल्डीलॉक्स फेज़” बताया, जहां तेज विकास और निम्न महंगाई दोनों साथ दिखाई दिए। अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर घटकर 0.25 प्रतिशत पर आ गई, जो अब तक का न्यूनतम स्तर है। इसके बाद भी यह आरबीआई के 4 प्रतिशत लक्ष्य से काफी नीचे रही। अनुकूल परिस्थितियों में आरबीआई ने नीतिगत दरों में कुल 125 आधार अंकों की कटौती कर रेपो दर 5.25 प्रतिशत कर दी।
सुधारों के मोर्चे पर भी 2025 महत्वपूर्ण रहा। सितंबर में GST 2.0 लागू किया गया, जिसमें कर ढांचा सरल बनाते हुए मुख्यतः 5 और 18 प्रतिशत की दरें रखी गईं। विलासिता और हानिकारक वस्तुओं पर 40 प्रतिशत कर निर्धारित किया गया। आवश्यक वस्तुएं, दवाइयां, कृषि उपकरण और बीमा प्रीमियम सस्ते हुए। बजट 2025 में 12 लाख रुपये तक की आय को करमुक्त करने से लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी।
शेयर बाजारों में वर्ष भर उतार-चढ़ाव रहा। बीच वर्ष में बाजार नई ऊंचाइयों पर पहुंचे, निफ्टी 50 ने 26,326 और सेंसेक्स ने 86,159 का स्तर छुआ। वर्षांत में वैश्विक परिस्थितियों के कारण कुछ नरमी देखी गई, लेकिन बुनियादी आर्थिक संकेतक मजबूत रहे।
विदेश व्यापार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई। भारत–न्यूजीलैंड FTA और भारत–ओमान CEPA ने नए अवसर पैदा किए और निर्यात-प्रधान विकास को बल दिया। साथ ही, पूंजीगत व्यय, बुनियादी ढांचा निवेश, ऊर्जा और सामाजिक क्षेत्रों में निवेश ने रोजगार और विकास दोनों को गति दी।
समग्र रूप से 2025 भारत की आर्थिक मजबूती, सुधार और लचीलेपन का वर्ष रहा। वैश्विक जोखिमों के बावजूद, व्यापक सुधारों, टैक्स सरलीकरण, निम्न महंगाई और सक्रिय व्यापार नीति के कारण भारत ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की। 2026 में प्रवेश करते हुए, मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक आधार, जारी सुधार और वैश्विक साझेदारी भारत को अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।



