मकर संक्रांति पर नए ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में शिफ्ट होगा पीएम ऑफिस, साउथ ब्लॉक बनेगा म्यूजियम

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहे हैं। 14 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री अपना कार्यालय सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बने नए ‘सेवा तीर्थ’ (Seva Teerth) परिसर में स्थानांतरित करेंगे। इसके साथ ही दशकों से साउथ ब्लॉक में स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का अध्याय समाप्त हो जाएगा।
यह कदम न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाएगा, बल्कि भारत की औपनिवेशिक विरासत से बाहर निकलकर एक नई प्रशासनिक पहचान गढ़ने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
एक ही परिसर में होंगे देश के सबसे अहम दफ्तर
सेवा तीर्थ परिसर सेंट्रल विस्टा परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश के शीर्ष प्रशासनिक और रणनीतिक संस्थानों को एक ही स्थान पर लाना है। यह परिसर एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-I में, वायु भवन के पास स्थित है और इसमें तीन अत्याधुनिक इमारतें बनाई गई हैं—
सेवा तीर्थ-1: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
सेवा तीर्थ-2: कैबिनेट सचिवालय
सेवा तीर्थ-3: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का कार्यालय
कैबिनेट सचिवालय पहले ही सितंबर 2025 में सेवा तीर्थ-2 में शिफ्ट हो चुका है, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय जल्द ही सेवा तीर्थ-3 में काम शुरू करेगा।
कैसा होगा नया प्रधानमंत्री कार्यालय?
प्रधानमंत्री का नया कार्यालय सेवा तीर्थ-1 में स्थित होगा। यह भवन आधुनिक वास्तुकला, हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था, स्मार्ट ऑफिस स्पेस और बड़े औपचारिक कक्षों से सुसज्जित है।
इस इमारत की पूरी अवधारणा ‘सेवा’ पर आधारित है, यानी शासन का केंद्र सत्ता नहीं बल्कि जनता की सेवा होगी। डिज़ाइन और कार्यप्रणाली दोनों में पारदर्शिता और दक्षता को प्राथमिकता दी गई है।
साउथ और नॉर्थ ब्लॉक बनेंगे भव्य संग्रहालय
इस बदलाव का एक ऐतिहासिक पहलू यह भी है कि आजादी के बाद से अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक में ही स्थित रहा है। पीएमओ के स्थानांतरण के बाद साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को आम जनता के लिए एक विशाल संग्रहालय में बदला जाएगा।
इस संग्रहालय का नाम होगा ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’, जहां भारत की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन और आधुनिक विकास यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा। यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास और विरासत का जीवंत दस्तावेज बनेगा।
परियोजना की लागत और निर्माण
सेवा तीर्थ परिसर का निर्माण देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने किया है।
कुल लागत: ₹1,189 करोड़
कुल क्षेत्रफल: 2,26,203 वर्ग फीट
इसके पास ही प्रधानमंत्री के नए आवास का निर्माण भी चल रहा है, जिसे ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव पार्ट-2’ नाम दिया गया है।
पीएम मोदी की सोच से जुड़ा फैसला
सेवा तीर्थ में पीएमओ का स्थानांतरण प्रधानमंत्री मोदी की उस व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसके तहत वे देश को औपनिवेशिक मानसिकता और प्रतीकों से मुक्त करना चाहते हैं।
राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करना, सरकारी परिसरों को भारतीय मूल्यों से जोड़ना और प्रशासन को ‘सेवा’ के विचार से संचालित करना—ये सभी इसी दृष्टिकोण के उदाहरण हैं।
नई प्रशासनिक पहचान की ओर भारत
कुल मिलाकर, सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री कार्यालय का स्थानांतरण केवल एक भवन परिवर्तन नहीं है। यह भारत की नई प्रशासनिक संस्कृति, नई पहचान और भविष्य की दिशा को दर्शाता है, जहां शासन का उद्देश्य सत्ता प्रदर्शन नहीं, बल्कि जनसेवा और कर्तव्यबोध है।



