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हर बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति सुसमाचार प्रचार के लिए जिम्मेदार: पोप लियो XIV

Pope Leo XIV ने विश्वभर के कैथोलिक समुदाय से आह्वान किया है कि वे चर्च में आम विश्वासियों (लेइटी) की भूमिका को पुनः समझें और सक्रिय रूप से आस्था के प्रसार में भाग लें। सेंट पीटर्स स्क्वायर में आयोजित जनरल ऑडियंस के दौरान उन्होंने यह संदेश दिया।

पोप ने अपने प्रवचन में Lumen Gentium के दूसरे अध्याय का उल्लेख करते हुए कहा कि चर्च केवल पादरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी विश्वासियों का एक साझा समुदाय है। उन्होंने कहा कि हर बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति को ईश्वर के लोगों का हिस्सा होने के नाते अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हर बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति “सुसमाचार प्रचार का सक्रिय माध्यम” है और उसे अपने जीवन के माध्यम से मसीह के संदेश को फैलाना चाहिए। यह जिम्मेदारी केवल धार्मिक नेताओं की नहीं, बल्कि हर आम विश्वासी की भी है।

पोप ने बताया कि चर्च की एकता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है, जो उसे सत्य की रक्षा करने और सही मार्ग दिखाने में सक्षम बनाती है। उन्होंने ‘सेंसस फिदेई’ यानी आस्था की सामूहिक समझ का जिक्र करते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की क्षमता नहीं, बल्कि पूरे चर्च समुदाय की सामूहिक शक्ति है।

Pope Francis के विचारों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि चर्च के सभी सदस्य, चाहे उनकी भूमिका कुछ भी हो, ‘ईश्वर के पवित्र लोगों’ के रूप में समान गरिमा रखते हैं। यही समानता चर्च की एकता का आधार है।

पोप लियो XIV ने यह भी कहा कि पवित्र आत्मा (Holy Spirit) ही चर्च को जीवंत बनाए रखती है और सभी विश्वासियों को अलग-अलग प्रकार के आध्यात्मिक गुण और क्षमताएं प्रदान करती है, जिससे वे समाज और चर्च के विकास में योगदान दे सकें।

अपने संदेश के अंत में उन्होंने विश्वासियों से अपील की कि वे चर्च को एक जीवंत और आत्मा-प्रेरित समुदाय के रूप में समझें और निष्क्रिय दर्शक बनने के बजाय सक्रिय भागीदारी निभाएं।

 

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