गणतंत्र दिवस परेड 2026 में मध्य प्रदेश की झांकी ने मनाया लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर का 300वां जन्म जयंती वर्ष
नई दिल्ली, जनवरी 2026 : 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत मध्य प्रदेश की झांकी ‘पुण्यश्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर’ ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। यह भव्य झांकी लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती को समर्पित थी, जिसमें उनके सुशासन, आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण की अद्वितीय विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया।
गणतंत्र दिवस परेड की सलामी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने ली। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य और अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
झांकी के अग्र भाग में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की पद्मासन मुद्रा में विराजमान प्रतिमा दिखाई गई, जिनके हाथ में शिवलिंग था। यह दृश्य भारत की मातृ-शक्ति की गरिमा, आध्यात्मिक चेतना और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक था।
मध्य भाग में लोकमाता को उनके मंत्रियों और सैनिकों के साथ दर्शाया गया, जो उनके सशक्त प्रशासन, न्यायप्रिय शासन और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
झांकी के निचले हिस्से में होलकर शासनकाल में निर्मित एवं पुनर्स्थापित मंदिरों का भव्य चित्रण किया गया, जिसमें एक सैनिक सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का संदेश देता नजर आया। वहीं, झांकी के अंतिम भाग में राजधानी महेश्वर के घाट, मंदिर और किले का मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया गया।
पवित्र नर्मदा नदी, घाटों और नौकाओं की कलात्मक प्रस्तुति ने झांकी को आध्यात्मिक भाव प्रदान किया। पृष्ठभूमि में महेश्वर घाटों के मंदिर शिखर दिखाई दिए। साथ ही, भित्ति चित्रों में लोकमाता अहिल्याबाई के मार्गदर्शन में महिलाएं महेश्वरी साड़ियां बुनती हुई दिखाई गईं, जो महिला सशक्तिकरण, स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत की सोच का सशक्त प्रतीक बनीं।
यह झांकी न केवल लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के गौरवशाली व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि थी, बल्कि उनके आदर्शों को आज के भारत से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बनी।



